नई दिल्ली, 7 नवंबर 2025: भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर आज पूरे देश में उत्साह का संचार हो गया। 1875 में बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित यह अमर गीत, जो स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा स्रोत बना, आज फिर से राष्ट्र की एकता और गौरव का प्रतीक बनकर उभरा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित भव्य समारोह का उद्घाटन करते हुए वर्ष भर चलने वाले स्मरणोत्सव की शुरुआत की। यह कार्यक्रम 7 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2026 तक चलेगा, जिसमें राष्ट्रव्यापी कार्यक्रमों के माध्यम से ‘वंदे मातरम’ की ऐतिहासिक महत्वता को युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जाएगा।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: एक गीत जो बना राष्ट्र का उद्घोष
‘वंदे मातरम’ की रचना का श्रेय बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को जाता है, जिन्होंने 7 नवंबर 1875 को अक्षय नवमी के पावन अवसर पर अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ में इस गीत को स्थान दिया। यह गीत मात्र एक रचना नहीं, बल्कि मातृभूमि की आराधना का प्रतीक है, जो ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीयों के हृदय में आग जला गया। 1905 के बंगाल विभाजन के दौरान इस गीत ने स्वदेशी आंदोलन को नई ऊर्जा प्रदान की। महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों ने इसे अपना हथियार बनाया।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा द्वारा इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा प्रदान किया गया। आज, 150 वर्ष बाद, यह गीत भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “वंदे मातरम मां भारती की अराधना है। यह हमारे आत्मविश्वास को बढ़ाता है और हमें एकजुट करता है।” उन्होंने नेहरू युग में गीत से दुर्गा स्तुति वाले छंद को हटाने का जिक्र करते हुए कहा कि यह राष्ट्रप्रेम की भावना को कमजोर करने का प्रयास था, लेकिन आज हम इसे पूर्ण रूप में गा रहे हैं।
भव्य उद्घाटन समारोह: इंदिरा गांधी स्टेडियम में राष्ट्रगान का सामूहिक जाप
दिल्ली के इंदिरा गांधी इनडोर स्टेडियम में आयोजित मुख्य समारोह में हजारों लोग एकत्र हुए। कार्यक्रम की शुरुआत राष्ट्रगान से हुई, उसके बाद सभी ने ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने स्टेज पर चढ़कर स्वयं गीत गाया, जिसकी तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा स्टेडियम गूंज उठा। उन्होंने एक स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का भी जारी किया, जो इस ऐतिहासिक वर्ष की याद दिलाएंगे।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी उपस्थित थे, जिन्होंने कहा, “150 वर्ष बाद भी ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रवाद की शाश्वत ज्योति जलाता रहता है। यह गीत हमें हमारी जड़ों से जोड़ता है।” समारोह में सांस्कृतिक प्रदर्शन भी हुए, जिसमें पारंपरिक नृत्य, संगीत और कविता पाठ शामिल थे। एक विशेष वीडियो भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें ‘वंदे मातरम’ के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को दर्शाया गया।
राष्ट्रव्यापी उत्सव: हर कोने में गूंजा ‘वंदे मातरम’
यह स्मरणोत्सव केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। पूरे भारत में स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों और सामुदायिक केंद्रों में सामूहिक गायन के कार्यक्रम आयोजित हुए। महाराष्ट्र में राज्यव्यापी आयोजन हुए, जहां मुंबई से लेकर नागपुर तक सड़कों पर लोग एकत्र होकर गीत गाते नजर आए।
मध्य प्रदेश के भोपाल में भाजपा प्रदेश कार्यालय में ‘वंदे मातरम-150वां स्मरणोत्सव’ का लाइव प्रसारण देखा गया। राजस्थान के कोटा में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने स्थानीय कार्यक्रम में भाग लिया, जहां शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और अन्य नेता उपस्थित थे।
सेना और अर्धसैनिक बलों ने भी उत्साह से भाग लिया। उत्तरी कमांड के सैनिकों ने सीमा पर ‘वंदे मातरम’ गाकर राष्ट्रप्रेम का प्रदर्शन किया। इंडो-तिब्बetan बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) की 48वीं वाहिनी ने मुख्यालय और अग्रिम चौकियों पर सामूहिक गायन किया।
एनसीईआरटी परिसर में एक अनोखा कार्यक्रम हुआ, जहां मजदूरों के 14 बच्चों को स्कूल बैग, स्टेशनरी और जूते वितरित किए गए। निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी ने कहा कि यह ‘विकसित भारत @2047’ के सपने को साकार करने का प्रयास है।
दिल्ली के आईजीआई स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में भाजपा पार्षद जयवीर राणा ने पीएम मोदी के उद्बोधन को प्रेरणादायक बताया। इसी तरह, गोरखपुर के सेंट्रल आईपीएम सेंटर में कर्मचारियों ने गीत को भारत की आत्मा की अभिव्यक्ति बताया।
विवाद का छाया: नेहरू पर बीजेपी का निशाना
कार्यक्रम के दौरान राजनीतिक विवाद भी छिड़ गया। बीजेपी नेताओं ने जवाहरलाल नेहरू पर आरोप लगाया कि उन्होंने ‘वंदे मातरम’ से दुर्गा स्तुति वाले छंद को जानबूझकर हटा दिया था, जो हिंदू भावनाओं को ठेस पहुंचाने का प्रयास था। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “यह गीत पूर्ण रूप में ही राष्ट्रप्रेम का प्रतीक है।” विपक्ष ने इसे राजनीतिकरण का आरोप लगाया, लेकिन उत्सव का माहौल बरकरार रहा।
भविष्य की योजनाएं: वर्ष भर का उत्सव कैलेंडर
स्मरणोत्सव में कई कार्यक्रम निर्धारित हैं, जैसे:
- स्कूलों में कार्यशालाएं: गीत की रचना और महत्व पर व्याख्यान।
- सांस्कृतिक महोत्सव: नृत्य, संगीत और नाटक।
- डिजिटल अभियान: सोशल मीडिया पर #VandeMataram150 हैशटैग के साथ वीडियो शेयरिंग।
- स्मृति स्थल: बंकिम चंद्र के सम्मान में प्रदर्शनियां।
प्रधानमंत्री ने युवाओं से अपील की कि वे इस गीत को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।
संपादक अजय की कलम से- अमर गीत, अमर भारत
‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष भारत के गौरवशाली इतिहास का एक अध्याय हैं। आज का यह उत्सव न केवल अतीत को याद करने का माध्यम है, बल्कि भविष्य को प्रेरित करने का संकल्प भी। जैसे बंकिम चंद्र का कलम ने राष्ट्र को जगाया, वैसे ही आज यह गीत हमें विकसित भारत की ओर ले जा रहा है। भारत माता की जय!
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




