एन. चंद्रशेखरन को टाटा ग्रुप का चेयरमैन नियुक्त: टाटा ट्रस्ट्स ने तीसरे पांच वर्षीय कार्यकाल को मंजूरी दी
मुंबई, 14 अक्टूबर 2025 – भारत के सबसे प्रतिष्ठित उद्योग समूह टाटा ग्रुप ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए अपने चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन को तीसरा पांच वर्षीय कार्यकाल देने की मंजूरी दे दी है। टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ, जो ग्रुप की रिटायरमेंट नीति को तोड़ने वाला पहला मामला है। चंद्रशेखरन का वर्तमान कार्यकाल फरवरी 2027 में समाप्त हो रहा है, जब वे 65 वर्ष के हो जाएंगे, लेकिन अब वे ग्रुप के नेतृत्व को और मजबूत करने के लिए बने रहेंगे। यह फैसला टाटा सन्स के बोर्ड द्वारा अनुमोदित होने के बाद औपचारिक रूप से लागू होगा।
चंद्रशेखरन का सफर: टीसीएस से टाटा साम्राज्य तक
एन. चंद्रशेखरन, जिन्हें आमतौर पर ‘चंदू’ कहा जाता है, का जन्म 2 जून 1963 को तमिलनाडु के नमक्कल जिले के मोहनुर में एक तमिल परिवार में हुआ था। उन्होंने नागपुर के विज्ञान कॉलेज से बीएससी और आईआईटी बॉम्बे से एम.टेक की डिग्री हासिल की। 1987 में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) में एक जूनियर सॉफ्टवेयर इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू करने वाले चंद्रशेखरन ने 2009 में कंपनी के सीईओ और एमडी का पद संभाला। उनके नेतृत्व में टीसीएस वैश्विक स्तर पर एक आईटी दिग्गज बनी।
अक्टूबर 2016 में वे टाटा सन्स के बोर्ड में शामिल हुए और जनवरी 2017 में साइरस मिस्त्री के इस्तीफे के बाद चेयरमैन बने। फरवरी 2017 से वे आधिकारिक रूप से पदभार संभाल रहे हैं। फरवरी 2022 में उन्हें दूसरा पांच वर्षीय कार्यकाल मिला, जिसे शेयरधारकों ने जुलाई 2022 में मंजूरी दी। अब तीसरा कार्यकाल मिलने से वे 2032 तक ग्रुप का नेतृत्व करेंगे।
टाटा ट्रस्ट्स का फैसला: रिटायरमेंट नियम तोड़ा, स्थिरता को प्राथमिकता
टाटा ग्रुप की रिटायरमेंट नीति के अनुसार, कार्यकारी पदों पर 65 वर्ष की आयु के बाद सेवानिवृत्ति अनिवार्य है, हालांकि गैर-कार्यकारी भूमिकाओं में 70 वर्ष तक काम किया जा सकता है। लेकिन 11 सितंबर 2025 को हुई टाटा ट्रस्ट्स की बैठक में नोएल टाटा और वेणु श्रीनिवासन द्वारा प्रस्तावित यह विस्तार सर्वसम्मति से पारित हो गया। स्रोतों के अनुसार, यह फैसला ग्रुप की महत्वाकांक्षी परियोजनाओं – जैसे सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक व्हीकल बैटरी और एयर इंडिया के विस्तार – को देखते हुए लिया गया है। टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा सन्स का 66 प्रतिशत शेयर रखती है, ने चंद्रशेखरन को ‘रणनीतिक परिवर्तनों और नई दिशा’ के लिए आवश्यक बताया।
टाटा सन्स के बोर्ड को अब इसकी औपचारिक मंजूरी देनी होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विस्तार ग्रुप की स्थिरता सुनिश्चित करेगा, खासकर जब ट्रस्ट्स के अंदर टाटा सन्स की स्वामित्व संरचना पर मतभेद चल रहे हैं। कुछ ट्रस्टी निजी स्वामित्व बनाए रखने के पक्ष में हैं, जबकि अन्य बदलाव चाहते हैं। चंद्रशेखरन का नेतृत्व इस संक्रमण काल में महत्वपूर्ण होगा।
उपलब्धियां: ग्रुप को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया
चंद्रशेखरन के नेतृत्व में टाटा ग्रुप ने अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की है। पिछले आठ वर्षों में समूह का राजस्व दोगुना से अधिक हो गया है, और कुल निवेश 5.5 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। एयर इंडिया का अधिग्रहण, टाटा न्यूजीलैंड, टाटा टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक व्हीकल सेगमेंट में निवेश जैसी रणनीतियां उनकी दूरदृष्टि का प्रमाण हैं। 2024 में ग्रुप की कुल आय 11 लाख करोड़ रुपये से अधिक रही, जो वैश्विक स्तर पर टाटा को मजबूत बनाती है।
उन्होंने आईईईई के वरिष्ठ सदस्य के रूप में और नास्कॉम के पूर्व चेयरमैन के रूप में भी योगदान दिया है। कई विश्वविद्यालयों से मानद डॉक्टरेट प्राप्त चंद्रशेखरन को टाटा की नैतिकता और मूल्यों को बनाए रखने के लिए जाना जाता है।
राजनीतिक और आर्थिक प्रभाव: भविष्य की दिशा
यह नियुक्ति टाटा ग्रुप के भविष्य को आकार देगी। भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था में टाटा जैसे समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण है, और चंद्रशेखरन का विस्तार सेमीकंडक्टर और ईवी जैसे क्षेत्रों में निवेश को गति देगा। हालांकि, शापूरजी पलोनजी परिवार (जो 18.4 प्रतिशत शेयर रखता है) के पिछले मतभेदों को देखते हुए, यह फैसला ग्रुप की एकजुटता को मजबूत कर सकता है।
विश्लेषक केतन दलाल का कहना है, “यह असामान्य लग सकता है, लेकिन ग्रुप की महत्वाकांक्षाओं के लिए आवश्यक है।”
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




