नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2025 – तमिलनाडु के करूर में 27 सितंबर को अभिनेता से राजनेता बने थलपति विजय की जनसभा के दौरान मची भगदड़ की घटना ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। इस दुखद हादसे में 41 लोगों की जान चली गई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे, जबकि दर्जनों लोग घायल हुए। घटना के दो सप्ताह बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए इसकी जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। अदालत ने पूर्व न्यायाधीश अजय रस्तोगी की अगुवाई में एक निगरानी समिति भी गठित की है, जो जांच की प्रगति पर नजर रखेगी। यह फैसला पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की उम्मीद की किरण लेकर आया है, लेकिन सवाल अभी भी बाकी हैं कि क्या यह जांच निष्पक्ष और समयबद्ध होगी?
घटना का काला अध्याय: क्या हुआ था करूर में?
तमिलनाडु वेत्री कझगम (टीवीके) के संस्थापक और लोकप्रिय अभिनेता विजय की करूर में आयोजित एक बड़ी जनसभा में भीड़ का उमड़ना ही मौत का कारण बना। रैली स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था की कमी, भीड़ प्रबंधन में लापरवाही और आयोजकों की अनदेखी के चलते भगदड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोग एक-दूसरे पर गिरते चले गए, जिसमें कई महिलाएं और बच्चे फंस गए। मरने वालों में 13 वर्षीय एक नाबालिग लड़की भी शामिल थी, जिसके पिता ने बाद में अदालत का दरवाजा खटखटाया।
घटना के तुरंत बाद तमिलनाडु पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया और मद्रास हाईकोर्ट ने एकल सदस्यीय आयोग के माध्यम से जांच के आदेश दिए। लेकिन पीड़ित परिवारों और टीवीके ने राज्य पुलिस की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए सीबीआई जांच की मांग की। भाजपा नेता उमा आनंदन और टीवीके महासचिव आधव अर्जुन की याचिकाओं ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचाया।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला: सीबीआई को जिम्मेदारी, निगरानी समिति बनी वॉचडॉग
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस जे.के. अंजारिया की बेंच ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सीबीआई एक वरिष्ठ अधिकारी की अगुवाई में जांच करेगी और अन्य एजेंसियों से सहयोग लेगी। इसके अलावा, पूर्व जज अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय सुपरवाइजरी कमेटी गठित की गई है, जो जांच की निगरानी करेगी और जरूरी निर्देश जारी कर सकेगी।
कोर्ट ने सीबीआई निदेशक को आदेश दिया है कि वह मासिक रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपें। मद्रास हाईकोर्ट के एसआईटी और आयोग गठन के आदेश को फिलहाल निलंबित कर दिया गया है। जस्टिस अंजारिया ने फैसले में कहा, “यह घटना नागरिकों के मौलिक अधिकारों से जुड़ी है। स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना हमारी प्राथमिकता है।” अदालत ने यह भी जोर दिया कि राजनीतिक दबाव से जांच प्रभावित न हो।
इस फैसले का स्वागत करते हुए टीवीके ने कहा कि यह न्याय की दिशा में एक बड़ा कदम है। पार्टी प्रवक्ता ने बताया, “हम राज्य सरकार की लापरवाही पर सवाल उठाते रहे हैं। अब सीबीआई से उम्मीद है कि सच्चाई सामने आएगी।” वहीं, विपक्षी दलों ने भी अदालत के इस कदम को सराहा, लेकिन सवाल उठाया कि इतनी देरी क्यों हुई?
राजनीतिक रंग: विजय की एंट्री और राज्य सरकार पर आरोप
यह घटना तमिलनाडु की राजनीति में नया मोड़ ला सकती है। थलपति विजय, जो हाल ही में टीवीके के बैनर तले सक्रिय राजनीति में उतरे हैं, की रैली ने उनकी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया था। लेकिन हादसे के बाद विपक्ष ने डीएमके सरकार पर सुरक्षा में चूक का आरोप लगाया। टीवीके ने याचिका में कहा कि पुलिस ने आयोजकों को पहले ही चेतावनी दी थी, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
राज्य सरकार ने बचाव में कहा कि भीड़ अनियोजित रूप से बढ़ गई थी, लेकिन अदालत ने इसे खारिज करते हुए केंद्रीय एजेंसी को जांच सौंपी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आगामी चुनावों में राजनीतिक बहस का मुद्दा बनेगा।
पीड़ित परिवारों की उम्मीदें: न्याय कब मिलेगा?
भगदड़ में मारे गए 41 लोगों के परिवार आज भी सदमे में हैं। एक पीड़ित के भाई ने बताया, “हमारी बहन सिर्फ विजय जी को देखने गई थी, लेकिन लौटी ही नहीं। राज्य पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं था, अब सीबीआई से न्याय की आस है।” अदालत ने मुआवजे और पुनर्वास पर भी केंद्र सरकार से रिपोर्ट मांगी है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




