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ISRO का GSLV-F18/NVS-03 मिशन: भारत के नेविगेशन सिस्टम ‘NavIC’ को मिलेगी नई ताकत

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने नेविगेशन उपग्रह NVS-03 के प्रक्षेपण की पूरी तैयारी कर ली है। इस उपग्रह को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) के द्वितीय लॉन्च पैड से GSLV-F18 रॉकेट के जरिए भू-तुल्यकालिक हस्तांतरण कक्षा (Geosynchronous Transfer Orbit – GTO) में स्थापित किया जाएगा।

NVS (Next Generation Navigation Satellite) श्रृंखला का यह तीसरा उपग्रह भारत की स्वदेशी नेविगेशन प्रणाली NavIC (Navigation with Indian Constellation) को और अधिक मजबूत तथा सटीक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

मिशन से जुड़ी मुख्य बातें

विवरण विवरण/आंकड़े
प्रक्षेपण यान (Launch Vehicle) GSLV-F18 (GSLV की 20वीं उड़ान)
उपग्रह का नाम NVS-03 (वजन: लगभग 2,232 किग्रा)
स्थान सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR), श्रीहरिकोटा
मुख्य उद्देश्य NavIC नेविगेशन नेटवर्क को मजबूती प्रदान करना और L1 सिग्नल सेवा का विस्तार

NVS-03 उपग्रह की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं

  1. स्वदेशी रुबिडियम परमाणु घड़ी (Rubidium Atomic Clock):NVS-03 में भारत में बनी रुबिडियम परमाणु घड़ी शामिल है। यह परमाणु घड़ी बेहद सटीक समय (High-precision timing) दर्ज करती है, जो लोकेशन और जीपीएस/नेविगेशन की सटीकता के लिए बेहद आवश्यक होती है।

  2. सिविलियन L1 बैंड सिग्नल सपोर्ट:पारंपरिक L5 और S बैंड के अलावा, NVS-03 में L1 सिग्नल भी जोड़ा गया है। यह बैंड आम स्मार्टफोन्स और कंज्यूमर वियरेबल्स में इस्तेमाल होता है, जिससे आम नागरिक भी दैनिक नेविगेशन (जैसे गूगल मैप्स या राइड ऐप्स) के लिए आसानी से NavIC का उपयोग कर सकेंगे।

  3. विस्तृत कवरेज दायरा: यह उपग्रह भारत के संपूर्ण भू-भाग के साथ-साथ भारतीय सीमाओं से 1,500 किलोमीटर तक के बाहरी क्षेत्र में भी निर्बाध और सटीक रियल-टाइम पोजीशनिंग (PNT – Positioning, Navigation, and Timing) सेवाएं देगा।

  4. उन्नत एन्क्रिप्शन सिस्टम: रणनीतिक और रक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इस उपग्रह में उन्नत एन्क्रिप्शन प्रणाली शामिल की गई है।

भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन?

  • जीपीएस (GPS) पर निर्भरता होगी कम: अमेरिका के जीपीएस (GPS) और रूस के ग्लोनास (GLONASS) के विकल्प के रूप में भारत का अपना NavIC सिस्टम अब और अधिक मजबूत हो जाएगा।

  • रणनीतिक और नागरिक उपयोग: सैन्य संचालन, सुरक्षा बलों के ट्रैकिंग सिस्टम, समुद्री नौवहन, आपदा प्रबंधन और नागरिक वाहनों की जीपीएस ट्रैकिंग में NVS-03 का महत्वपूर्ण योगदान रहेगा।

  • NavIC 2.0 की दिशा में बड़ा कदम: NVS सीरीज के सैटेलाइट्स NavIC की दूसरी पीढ़ी (NavIC 2.0) का हिस्सा हैं, जो भविष्य की स्मार्ट और स्वायत्त परिवहन प्रौद्योगिकियों को सहायता प्रदान करेंगे।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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