लखनऊ/मुंबई: लखनऊ के चर्चित कैफे संचालक शिवा शर्मा की मौत के मामले में मुख्य आरोपी और मॉडल-इन्फ्लुएंसर श्रद्धा दुबे (Shraddha Dubey) की गिरफ्तारी के बाद कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे उत्तर प्रदेश और मुंबई की पुलिस के सामने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय व अंतर-राज्यीय आपराधिक नेटवर्क के तार जुड़ते नजर आ रहे हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार, ग्लैमर की दुनिया की आड़ में श्रद्धा दुबे मुंबई के कुख्यात ‘जेड गैंग’ (Z Gang) के ड्रग्स और तस्करी रैकेट से जुड़ी हुई थी। आइए जानते हैं इस पूरे सिंडिकेट और उसके कनेक्शन को लेकर क्या खुलासे हुए हैं।
1. मुंबई के ‘जेड गैंग’ और ड्रग्स सिंडिकेट से संबंध
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, श्रद्धा दुबे ने पिछले कुछ वर्षों में मुंबई के बांद्रा और अंधेरी इलाकों में अपनी मॉडलिंग और सोशल प्रोफाइल के जरिए गहरी पैठ बना ली थी।
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जुल्फिकार बेहलीम उर्फ जुल्फी का कनेक्शन: इस कथित ‘जेड गैंग’ का सरगना जुल्फिकार बेहलीम है, जो पहले से ही मकोका (MCOCA) और रंगदारी के मामलों में शिकंजे में है।
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उत्तर प्रदेश में नेटवर्क की कमान: जांच में यह बात सामने आई है कि श्रद्धा इस सिंडिकेट के लिए उत्तर प्रदेश और अन्य क्षेत्रों में अवैध गतिविधियों का दायरा संभालने में मदद करती थी। गैंग की महिला सदस्य (जैसे नीलोफर आदि) नई मॉडल्स और युवतियों को इस नेटवर्क से जोड़ती थीं ताकि पुलिस की नजरों से बचा जा सके।
2. मॉडलिंग की आड़ में ड्रग्स और तस्करी का काला कारोबार
जांच एजेंसियों की छानबीन में यह बात भी सामने आई है कि श्रद्धा और उसका यह गिरोह केवल नशीले पदार्थों की तस्करी तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके तार अन्य गंभीर अपराधों से भी जुड़े थे:
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पेज-3 और रेव पार्टियां: आरोप है कि यह गैंग मुंबई और अन्य महानगरों की हाई-प्रोफाइल रेव या पेज-3 पार्टियों में ड्रग्स की सप्लाई करता था।
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हनीट्रैप और ब्लैकमेलिंग: पुलिस यह भी खंगाल रही है कि कैसे यह गिरोह रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को अपने जाल में फंसाकर (हनीट्रैप) डिजिटल साक्ष्य या वीडियो जुटाता था और फिर उनसे अवैध वसूली (Extortion) व तस्करी के लिए रास्ता साफ करवाता था।
3. गिरफ्तारी और आगे की जांच
नागपुर से एसटीएफ और उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा अपनी बहन और ड्राइवर के साथ पकड़े जाने के बाद से श्रद्धा लगातार पूछताछ के दायरे में है। उसके पास से बरामद मोबाइल फोंस और अन्य डिजिटल उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। मुंबई पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स सेल (ANC) और यूपी एसटीएफ संयुक्त रूप से यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इस सिंडिकेट में और कौन-कौन से बड़े चेहरे शामिल हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




