भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सुरक्षा दुनिया की सबसे चाक-चौबंद और आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों में गिनी जाती है। राजधानी दिल्ली में जब भी प्रधानमंत्री किसी सार्वजनिक कार्यक्रम, दौरे या राष्ट्रीय पर्व में शामिल होते हैं, तो उनकी सुरक्षा के लिए एक बेहद सख्त त्रिस्तरीय सुरक्षा चक्र (Three-Tier Security System) लागू किया जाता है।
इस त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था में देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियां—विशेष सुरक्षा समूह (SPG), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG), अर्धसैनिक बल और दिल्ली पुलिस मिलकर काम करती हैं।
सुरक्षा का त्रिस्तरीय ढांचा (Three-Tier Structure)
प्रधानमंत्री के आसपास सुरक्षा घेरे को तीन मुख्य स्तरों में बांटा जाता है:
1. प्रथम स्तर (प्रोक्सिमेट सिक्योरिटी / अंतरंग सुरक्षा घेरा)
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जिम्मेदारी: यह प्रधानमंत्री का सबसे नजदीकी और सबसे संवेदनशील सुरक्षा घेरा होता है, जिसकी पूरी कमान SPG (Special Protection Group) के हाथों में होती है।
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विशेषताएं: एसपीजी के कमांडो अमेरिका की सीक्रेट सर्विस की तर्ज पर प्रशिक्षित होते हैं। ये कमांडो अत्याधुनिक हथियारों (जैसे FN F2000 असॉल्ट राइफल और ऑटोमैटिक पिस्तौल) से लैस रहते हैं। प्रधानमंत्री के ठीक साथ चलने वाले इन जवानों का मुख्य उद्देश्य किसी भी आपात या आकस्मिक स्थिति में उन्हें तुरंत सुरक्षित कवच प्रदान करना होता है।
2. द्वितीय स्तर (आउटर कॉर्डन / बाहरी सुरक्षा घेरा)
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जिम्मेदारी: यह घेरा प्रथम स्तर के ठीक बाहर होता है, जिसे दिल्ली पुलिस के विशेष यूनिट (जैसे SWAT, क्राइसिस रिस्पांस टीम) और अर्धसैनिक बलों के हवाले किया जाता है।
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विशेषताएं: इस स्तर पर तैनात जवान कार्यक्रम स्थल या मार्ग के चारों ओर एक मजबूत घेरा बनाते हैं। संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए इस दायरे में उच्च क्षमता वाले सीसीटीवी कैमरे, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और मेटल डिटेक्टर्स का इस्तेमाल किया जाता है। भीड़भाड़ वाले आयोजनों में इस घेरे को बहुत कड़ाई से लागू किया जाता है।
3. तृतीय स्तर (दूरी का घेरा और ट्रैफिक/इंटेलिजेंस विंग)
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जिम्मेदारी: यह सबसे बाहरी सुरक्षा परत होती है, जिसमें स्थानीय पुलिस, ट्रैफिक पुलिस, खुफिया एजेंसियां (IB) और केंद्रीय अर्धसैनिक बल (CRPF/BSF) शामिल होते हैं।
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विशेषताएं: इस स्तर का काम कार्यक्रम स्थल के दूरदराज के इलाकों, रास्तों, और ऊंची इमारतों को सुरक्षित करना है। छतों पर स्नाइपर्स (Snipers) तैनात किए जाते हैं। इसके अलावा, ट्रैफिक डायवर्जन और ‘नो-फ्लाई जोन’ का कड़ाई से पालन कराना इसी दायरे में आता है ताकि किसी भी बाहरी खतरे को बहुत पहले ही बेअसर किया जा सके।
काफिला और तकनीकी सुरक्षा उपाय
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बुलेटप्रूफ गाड़ियाँ और जैमर: दिल्ली में पीएम मोदी के काफिले में अत्याधुनिक रेंज रोवर और लैंड क्रूजर जैसी बुलेटप्रूफ गाड़ियां शामिल होती हैं। काफिले में इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेजर (ECM) वाहन भी होते हैं, जो रिमोट से होने वाले विस्फोटों (IED) को नाकाम करने के लिए जैमर से लैस होते हैं।
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मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियां कार्यक्रम से कई दिन पहले ‘एडवांस्ड सिक्योरिटी लियान’ (ASL) बैठकें करती हैं,, जिससे हर एक रूट और वेन्यू का बारीकी से सुरक्षा ऑडिट किया जाता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




