राजधानी नई दिल्ली में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान “बंद करो… दफा हो जाओ” जैसी अभद्र नारेबाजी और हंगामा देखने को मिला। CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और आइसा अध्यक्ष नेहा बोरा जब मीडिया को संबोधित कर रहे थे, तभी वहां मौजूद लोगों के विरोध और नारेबाजी के कारण पूरी प्रेस वार्ता अराजकता की भेंट चढ़ गई।
यह घटना न केवल राजनीतिक संवाद के गिरते स्तर को दर्शाती है, बल्कि सार्वजनिक मंचों और विरोध प्रदर्शनों की आड़ में फैल रही अराजकता पर भी कई गंभीर सवाल खड़े करती है।
अमर्यादित भाषा और लोकतंत्र की मर्यादा
लोकतांत्रिक व्यवस्था में असहमति और विरोध प्रदर्शन का अधिकार हर नागरिक को है, लेकिन “दफा हो जाओ” जैसे अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल सार्वजनिक संवाद की मर्यादा को ठेस पहुंचाता है। किसी भी राजनीतिक संगठन या छात्र समूह का प्रेस कॉन्फ्रेंस जैसे मंच पर इस तरह की भाषा का सामना करना या माहौल का इस हद तक बिगड़ना चिंताजनक है।
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संवाद की जगह हंगामा: नीतिगत मुद्दों पर तार्किक बहस करने के बजाय हुड़दंग और अभद्र भाषा का सहारा लेना सार्वजनिक चर्चा के स्तर को नीचे गिराता है।
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आम जनता को असुविधा: लगातार हो रहे प्रदर्शनों, सड़कों के घेराव और प्रेस कॉन्फ्रेंसों में होने वाले हंगामे के कारण दिल्ली-एनसीआर की आम जनता को दैनिक यातायात और आवाजाही में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का रुख और नियमों की अनदेखी
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनों और पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया था कि विरोध प्रदर्शन का अधिकार असीमित नहीं है और यह कानून व प्रशासनिक नियमों के अधीन ही होना चाहिए। इसके बावजूद, बिना उचित योजना या प्रशासनिक अनुमति के आयोजन करना और फिर सार्वजनिक मंचों पर अराजक माहौल पैदा करना नियमों की अनदेखी को दर्शाता है।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




