मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता अक्षय कुमार की बहन अलका भाटिया हीरानंदानी से जुड़े एक संपत्ति विवाद और धोखाधड़ी मामले में गिरफ्तार महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता गणेश चुक्कल को मुंबई की एक मजिस्ट्रेट अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है। अदालत ने हिरासत प्रक्रिया में कानून का कड़ाई से पालन न किए जाने और अवैध हिरासत के आधार पर यह फैसला सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला मुंबई के पवई स्थित ‘अडोनिया’ इमारत में एक फ्लैट की लीज डीड (पट्टा दस्तावेज) से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार:
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कंपनी व संपत्ति सम्बन्ध: यह संपत्ति मेलरोनिया हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ी है, जिसमें अक्षय कुमार की बहन अलका भाटिया हीरानंदानी बतौर निदेशक शामिल हैं।
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फर्जीवाड़े का आरोप: आरोप लगाया गया था कि MNS नेता गणेश चुक्कल ने 3 साल (36 महीने) के लीज एग्रीमेंट को बदलकर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर और नोटरी दस्तावेजों के जरिए 30 साल की फर्जी लीज डीड तैयार करवा ली थी।
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पुलिस कार्रवाई: पवई पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद 2 अक्टूबर को गणेश चुक्कल को गिरफ्तार किया था।
अदालत ने क्यों दिया रिहाई का आदेश?
मुंबई की मजिस्ट्रेट अदालत में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर प्रक्रियात्मक खामियां उजागर कीं:
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हिरासत का अवैध स्थानांतरण: मामला पवई पुलिस स्टेशन से मुंबई क्राइम ब्रांच की DCB CID यूनिट-10 को ट्रांसफर किए जाने के बाद, क्राइम ब्रांच ने 6 अक्टूबर को चुक्कल को हिरासत में लिया था।
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24 घंटे के भीतर पेशी न होना: नियमानुसार हिरासत में लेने के 24 घंटे के भीतर आरोपी को मजिस्ट्रेट (एस्प्लेनेड कोर्ट) के सामने पेश करना अनिवार्य होता है, लेकिन क्राइम ब्रांच द्वारा तीन दिनों तक ऐसा नहीं किया गया।
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कानूनी प्रक्रिया की अनदेखी: अदालत ने माना कि पुलिस एवं जांच एजेंसियों ने वैधानिक प्रक्रियाओं का उचित पालन नहीं किया, जिससे हिरासत अवैध हो गई।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




