नई दिल्ली:
राजधानी दिल्ली में उस समय बड़ा सियासी बवाल खड़ा हो गया, जब विरोध प्रदर्शन कर रहे लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस ने जबरन धरना स्थल से हटा दिया। प्रधानमंत्री आवास और संसद मार्ग के निकट धारा 144 लागू होने के बावजूद विपक्ष के वरिष्ठ नेता पैदल मार्च निकालते हुए प्रदर्शन स्थल पर जम गए थे।
मुख्य बिंदु और घटनाक्रम:
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सड़क पर बैठे नेता: सरकार के खिलाफ मांगों और विभिन्न मुद्दों को लेकर राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल तथा INDIA गठबंधन के अन्य प्रमुख नेता सुरक्षा घेरा तोड़कर सड़क पर ही धरने पर बैठ गए।
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पुलिस की कार्रवाई: इलाके में धारा 144 और सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए दिल्ली पुलिस व पैरामिलिट्री बलों ने नेताओं को हटाने का प्रयास किया। जब वे नहीं हटे, तो पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को बलपूर्वक उठाकर हिरासत में लिया और पुलिस बस के जरिए किंग्सवे कैंप/न्यू पुलिस लाइन ले जाया गया।
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धक्का-मुक्की और हंगामा: इस दौरान पुलिस और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की देखने को मिली, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
राहुल और प्रियंका गांधी का बयान:
हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा, “लोकतंत्र में जनता और छात्रों की आवाज उठाना हमारा अधिकार है। सरकार विपक्ष की आवाज को दबा नहीं सकती। यह संघर्ष देश के लोकतांत्रिक ढांचे और संविधान की रक्षा के लिए जारी रहेगा।”
वहीं प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार संसद से लेकर सड़क तक जनता के मुद्दों पर चर्चा से भाग रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर तानाशाही रवैया अपना रही है।
पुलिस व प्रशासन का पक्ष:
दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कार्रवाई आवश्यक थी। बिना पूर्व अनुमति और धारा 144 का उल्लंघन करने के कारण नेताओं को केवल अस्थायी हिरासत (Detention) में लिया गया था, जिन्हें औपचारिकताएं पूरी करने के बाद छोड़ दिया गया।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




