वाशिंगटन/अंकारा, 13 अगस्त 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जुलाई में तुर्की यात्रा के दौरान ईरान को उनकी सटीक लोकेशन की जानकारी थी। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी खुफिया एजेंसियों को अंकारा में ट्रंप के होटल और यहां तक कि उस बिल्डिंग के किस फ्लोर पर वे ठहरे हुए थे, इसकी भी जानकारी थी।
यह खुलासा उस समय सामने आया जब ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन (8 जुलाई) अंकारा छोड़ने वाले थे। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को कई स्रोतों से जानकारी मिली कि ईरान की ओर से एयर फोर्स वन पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमले का खतरा है। साथ ही, समिट स्थल के आसपास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल (शोल्डर-फायर्ड मिसाइल) के साथ देखा गया था।
सिक्योरिटी ऑपरेशन क्यों हुआ? अमेरिकी अधिकारियों ने इस खतरे को काफी गंभीर माना। इसी वजह से सीक्रेट सर्विस ने एक असाधारण ‘डिकॉय ऑपरेशन’ (धोखा देने वाला ऑपरेशन) अंजाम दिया। ट्रंप ने कैमरों और प्रेस के सामने पुराने एयर फोर्स वन में सवार होने का नाटक किया। इसके बाद उन्हें गुपचुप तरीके से कैटरिंग ट्रक में बैठाकर छोटे सैन्य विमान (C-32A) में शिफ्ट कर दिया गया। एयर फोर्स वन को डिकॉय के रूप में इस्तेमाल किया गया, जिसमें पत्रकार और कुछ अन्य अधिकारी सवार थे।
रिपोर्ट में क्या कहा गया? दो अमेरिकी अधिकारियों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि ईरानी ऑपरेटिव्स को ट्रंप की ठहरने की जगह की सटीक जानकारी थी, जिसमें होटल की मंजिल भी शामिल थी। यह जानकारी इतनी विश्वसनीय मानी गई कि राष्ट्रपति को गुप्त रूप से देश से निकालने का फैसला लिया गया।
ट्रंप ने बाद में इस बात को स्वीकार किया था कि उन्हें ईरान से लगातार खतरा बना रहता है और वे ईरान की ‘हिट लिस्ट’ में सबसे ऊपर हैं।
यह घटना अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आई है। सुरक्षा एजेंसियां इस खुफिया जानकारी की गहराई से जांच कर रही हैं कि ईरान को इतनी सटीक जानकारी कैसे मिली।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




