देहरादून, 13 अगस्त 2026: उत्तराखंड को ‘उल्लास – नव भारत साक्षरता कार्यक्रम’ (ULLAS) के अंतर्गत पूर्ण साक्षर राज्य घोषित कर दिया गया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) गुरमीत सिंह ने 8 जुलाई 2026 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी। इसके साथ ही उत्तराखंड देश का छठा पूर्ण साक्षर राज्य बन गया है।
राज्य की साक्षरता दर अब 98 प्रतिशत से अधिक हो गई है, जो केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 95 प्रतिशत के मानक से काफी ऊपर है। इससे पहले मिजोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम इस उपलब्धि को हासिल कर चुके हैं।
मुख्यमंत्री का बयान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताया। उन्होंने कहा, “यह उपलब्धि प्रदेशवासियों की सक्रिय भागीदारी और सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। ऐसे सामूहिक प्रयासों से ही विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। सरकार डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल और सतत शिक्षा को हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।”
केंद्रीय शिक्षा मंत्री की बधाई हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने मुख्यमंत्री धामी और उत्तराखंडवासियों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद राज्य ने उल्लेखनीय प्रगति की है और देश के लिए प्रेरणादायी उदाहरण पेश किया है।
उल्लास योजना क्या है? उल्लास (Understanding Lifelong Learning for All in Society) केंद्र सरकार की नव भारत साक्षरता कार्यक्रम है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है। यह 15 वर्ष से अधिक आयु के उन लोगों पर केंद्रित है, जो औपचारिक शिक्षा से वंचित रह गए थे। योजना में बुनियादी साक्षरता (पढ़ना, लिखना, गणना), डिजिटल साक्षरता, वित्तीय साक्षरता, जीवन कौशल और व्यावसायिक प्रशिक्षण शामिल हैं।
राज्य कैबिनेट ने 19 जून 2026 को पूर्ण साक्षर घोषित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। शिक्षा विभाग, स्वयंसेवी संगठन, कॉर्पोरेट और आम नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लेकर साक्षरता अभियान चलाया गया।
साक्षरता दर में तेजी 2023-24 में राज्य की साक्षरता दर 83.8 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर लगभग 98.7 प्रतिशत हो गई। योग्य आबादी में केवल लगभग 1.31 लाख लोग ही निरक्षर रह गए हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




