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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी नेताओं को भेंट की उत्तराखंड की ‘कुमाऊँ ऐपण कला’ और मनोहारी गोल्ड चाय, भारतीय संस्कृति की अनूठी छाप

नई दिल्ली, 14 जुलाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया विदेश यात्रा के दौरान विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों और प्रधानमंत्रियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक हस्तशिल्प से जुड़े विशेष उपहार भेंट किए। इन उपहारों में उत्तराखंड की प्रसिद्ध कुमाऊँ ऐपण (Aipan) लोक कला और राज्य की प्रतिष्ठित मनोहारी गोल्ड चाय प्रमुख आकर्षण रहीं। इन उपहारों के माध्यम से भारत की ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक जिला, एक उत्पाद (ODOP)’ जैसी पहलों को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों के नेताओं को उनके सांस्कृतिक महत्व और भारतीय परंपरा का परिचय कराने के उद्देश्य से विशेष रूप से तैयार किए गए उपहार भेंट किए। कुमाऊँ की पारंपरिक ऐपण कला से सुसज्जित स्मृति-चिह्न भारतीय लोक संस्कृति, आध्यात्मिकता और शिल्प कौशल का प्रतीक माने जाते हैं। वहीं, उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उत्पादित मनोहारी गोल्ड चाय अपनी विशिष्ट सुगंध, उत्कृष्ट गुणवत्ता और प्राकृतिक स्वाद के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बना रही है।

ऐपण कला उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र की सदियों पुरानी लोक चित्रकला है। पारंपरिक रूप से इसे शुभ अवसरों, धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों पर घरों की चौखट, पूजा स्थल और आंगन में बनाया जाता है। लाल गेरू की पृष्ठभूमि पर चावल के घोल से बनाए जाने वाले सफेद रंग के आकर्षक ज्यामितीय एवं धार्मिक डिज़ाइन इसकी विशेष पहचान हैं। यह कला भारतीय सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है।

इसी प्रकार मनोहारी गोल्ड चाय उत्तराखंड की उच्च पर्वतीय जलवायु में तैयार होने वाली प्रीमियम चाय है, जिसे अपनी उत्कृष्ट गुणवत्ता, प्राकृतिक खुशबू और सीमित उत्पादन के कारण विशेष स्थान प्राप्त है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री द्वारा इसे विदेशी नेताओं को उपहार स्वरूप दिए जाने से उत्तराखंड के चाय उत्पादकों और स्थानीय उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने की संभावना है।

प्रधानमंत्री मोदी पिछले कई वर्षों से विदेशी नेताओं को भारत के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कलाकृतियां, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पाद उपहार में देते रहे हैं। इससे न केवल भारत की सांस्कृतिक विविधता का प्रचार होता है, बल्कि स्थानीय कारीगरों, महिला स्वयं सहायता समूहों और लघु उद्योगों को भी वैश्विक स्तर पर प्रोत्साहन मिलता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के सांस्कृतिक उपहार भारत की सॉफ्ट पावर डिप्लोमेसी को मजबूत करने के साथ-साथ ‘मेक इन इंडिया’, ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘एक जिला, एक उत्पाद’ जैसी पहलों को भी वैश्विक पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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