लखनऊ, 7 जुलाई 2026 — उत्तर प्रदेश सरकार ने शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद कस्बे का नाम बदलकर परशुरामपुरी करने का फैसला लिया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। योगी आदित्यनाथ कैबिनेट की बैठक में यह प्रस्ताव पास होने के बाद अब आधिकारिक रूप से जलालाबाद को परशुरामपुरी कहा जाएगा।
फैसले की पृष्ठभूमि
जलालाबाद को भगवान परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। स्थानीय लोगों और हिंदू संगठनों की लंबे समय से मांग थी कि इस जगह का नाम उसके प्राचीन और धार्मिक महत्व के अनुरूप बदला जाए। मुगल काल में (लगभग 1560 के आसपास) इस जगह का नाम जलालाबाद पड़ा था। अब इसे अपनी मूल सांस्कृतिक पहचान वापस मिल गई है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उत्तर प्रदेश सरकार को कोई आपत्ति न होने का पत्र जारी किया। केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इस फैसले को “गर्व का क्षण” बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को धन्यवाद दिया।
परशुरामपुरी का महत्व
- धार्मिक महत्व: परशुराम जी की जन्मभूमि के रूप में प्रसिद्ध।
- प्रशासनिक बदलाव: जलालाबाद नगर पालिका परिषद अब परशुरामपुरी नगर पालिका परिषद के नाम से जानी जाएगी।
- प्रक्रिया: सभी सरकारी दस्तावेजों, नक्शों और रिकॉर्ड में नया नाम अपडेट किया जाएगा।
योगी सरकार की नामकरण नीति
यह बदलाव उत्तर प्रदेश में नाम बदलने की श्रृंखला का हिस्सा है। पहले प्रयागराज, अयोध्या जैसे नामों को उनकी प्राचीन पहचान दी गई थी। भाजपा सरकार का कहना है कि यह फैसला सांस्कृतिक पुनरुत्थान और ऐतिहासिक न्याय का प्रतीक है।
स्थानीय प्रतिक्रिया जलालाबाद के स्थानीय निवासियों, खासकर हिंदू समुदाय में खुशी का माहौल है। कई लोगों ने इसे “सच्ची पहचान की वापसी” बताया। वहीं कुछ विपक्षी दलों ने इसे विकास से ध्यान भटकाने वाला कदम बताया है।
नाम बदलने के बाद अब परशुरामपुरी में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने, मंदिर विकास और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की योजनाएं बनाई जा सकती हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST



