ईरान ने आज अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह पश्चिम एशिया और विश्व स्तर पर उभरती एशियाई शक्तियों—भारत, रूस और चीन—को वैश्विक संतुलन में प्रभाव बढ़ाने से रोकने के लिए तनाव और युद्ध की स्थिति को जानबूझकर बढ़ा रहा है।
मुख्य बिंदु:
- ईरान के विदेश मंत्रालय का बयान
ईरान ने कहा कि अमेरिका कई क्षेत्रों में अस्थिरता को भड़का रहा है ताकि एशिया में बढ़ती सामरिक साझेदारियों और आर्थिक गुटों को कमजोर किया जा सके।
बयान के अनुसार, अमेरिका क्षेत्रीय संघर्षों को “रणनीतिक उपकरण” की तरह इस्तेमाल कर रहा है। - एशियाई शक्तियों के उदय से चिंता
ईरान ने कहा कि एशिया की तीन बड़ी शक्तियाँ—भारत, रूस और चीन—अंतर्राष्ट्रीय राजनीति, व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा ढाँचों में तेजी से मजबूत सहयोग विकसित कर रही हैं।
ईरान का दावा है कि यह सहयोग अमेरिका के प्रभुत्व के लिए चुनौती बन रहा है। - क्षेत्रीय युद्ध और अमेरिकी नीति
ईरान का आरोप है कि अमेरिका मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ाकर देशों को विभाजित रखना चाहता है, ताकि चीन की आर्थिक पहुँच, भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं और रूस की क्षेत्रीय रणनीति को प्रभावित किया जा सके। - एशियाई गठबंधनों का बदलता स्वरूप
हाल के वर्षों में एशिया में निम्न बदलाव देखे गए हैं: • चीन की वैश्विक निवेश और कूटनीतिक पहलों में तेजी
• रूस का सुरक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सक्रिय होना
• भारत का इंडो-पैसिफिक और वैश्विक दक्षिण में उभरता प्रभावईरान का कहना है कि अमेरिका को यह बदलाव असहज कर रहा है।
- अमेरिका का आधिकारिक रुख
अमेरिकी प्रशासन ने बार-बार कहा है कि वह क्षेत्रीय स्थिरता, सुरक्षा और साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।
हालांकि, ईरान और कई अन्य देश इसे दोहरे मापदंड की नीति बताते हैं।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




