नई दिल्ली, 1 फरवरी 2026: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट 2026-27 में रक्षा क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया है। रक्षा बजट को पिछले वर्ष की तुलना में 10% बढ़ाकर 6.2 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। यह आवंटन देश की सुरक्षा को मजबूत करने, आधुनिक हथियारों की खरीद और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
रक्षा बजट की मुख्य विशेषताएं
वित्त मंत्री ने अपने भाषण में कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। हमारी सरकार आत्मनिर्भर भारत के विजन के तहत रक्षा क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है।” रक्षा बजट का ब्रेकडाउन इस प्रकार है:
- कैपिटल आवंटन: 2.5 लाख करोड़ रुपये, जो नए हथियारों, विमानों और जहाजों की खरीद के लिए है। इसमें राफेल फाइटर जेट्स के अतिरिक्त स्क्वाड्रन और स्वदेशी तेजस विमानों का उत्पादन शामिल है।
- राजस्व व्यय: 3 लाख करोड़ रुपये, जो सेना के वेतन, पेंशन और रखरखाव पर खर्च होगा। पेंशन सुधारों के तहत अग्निवीर योजना का विस्तार किया जाएगा।
- रिसर्च एंड डेवलपमेंट: 70 हजार करोड़ रुपये, जो डीआरडीओ और अन्य संस्थानों के लिए है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियार और साइबर सुरक्षा पर फोकस है।
- सीमा सुरक्षा: 30 हजार करोड़ रुपये, जो चीन और पाकिस्तान सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए है, जैसे सड़कें, हेलीपैड और सुरंगें।
यह बजट ऐसे समय में आया है जब वैश्विक तनाव बढ़ रहे हैं। यूक्रेन-रूस युद्ध और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की गतिविधियों के मद्देनजर भारत अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
आत्मनिर्भरता पर जोर
बजट में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की गईं। वित्त मंत्री ने कहा, “हम 75% रक्षा उपकरणों का स्वदेशी उत्पादन लक्ष्य रखते हैं।” इसके लिए निजी क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जाएगा, जिसमें टाटा, रिलायंस और एलएंडटी जैसी कंपनियों को शामिल किया जाएगा। आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 100 से अधिक हथियारों की सूची पर प्रतिबंध लगाया गया है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बजट का स्वागत करते हुए कहा, “यह आवंटन हमें विश्व स्तरीय सेना बनाने में मदद करेगा। हमारी सेनाएं अब और मजबूत होंगी।”
विपक्ष की प्रतिक्रिया
विपक्ष ने बजट को अपर्याप्त बताया। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा, “रक्षा बजट में वृद्धि दिखावटी है। सीमा पर सैनिकों की सुविधाओं पर ध्यान नहीं दिया गया।” वहीं, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने ट्वीट किया, “बजट में रक्षा से ज्यादा चुनावी खर्च पर फोकस है।”
विशेषज्ञों का विश्लेषण
रक्षा विशेषज्ञ मेजर जनरल (रिटायर्ड) जीडी बख्शी ने कहा, “यह बजट संतुलित है, लेकिन कैपिटल आवंटन को और बढ़ाने की जरूरत है।” इंस्टीट्यूट फॉर डिफेंस स्टडीज एंड एनालिसिस (आईडीएसए) के अनुसार, यह आवंटन जीडीपी का 2.5% है, जो वैश्विक औसत से कम है, लेकिन पिछले वर्षों से बेहतर है।
यह रक्षा बजट भारत को एक मजबूत सैन्य शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। आने वाले दिनों में संसद में इस पर बहस होगी, और रक्षा क्षेत्र के विकास पर नजर रहेगी।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




