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ट्रंप का नया कदम: अमेरिका को भारत-चीन-रूस समूह में शामिल करने की इच्छा, ‘कोर-5’ गठबंधन की योजना

वाशिंगटन, 12 दिसंबर 2025 (संवाददाता): अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ लाने की योजना का खुलासा किया है। जी7 के विकल्प के रूप में ‘कोर-5’ नामक एक नए सुपरक्लब का गठन करने की चर्चा तेज हो गई है, जिसमें अमेरिका, भारत, चीन, रूस और जापान शामिल होंगे। ट्रंप ने इसे ‘मजबूत अर्थव्यवस्थाओं का मजबूत गठबंधन’ बताते हुए कहा कि इससे वैश्विक व्यापार और सुरक्षा में नई स्थिरता आएगी। यह घोषणा ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में भारत के साथ बढ़ते तनाव के बीच आई है, जहां उन्होंने ब्रिक्स को ‘एंटी-अमेरिकन’ करार दिया था।

ट्रंप ने गुरुवार को एक साक्षात्कार में कहा, “हम जी7 को पीछे छोड़कर एक ऐसा समूह बनाना चाहते हैं जो वास्तविक शक्तियों को एकजुट करे। भारत, चीन, रूस – ये सभी हमारे साझेदार हो सकते हैं।” यह बयान पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार आया, जिसमें बताया गया कि ट्रंप प्रशासन ब्रिक्स के मूल सदस्यों को शामिल कर जी7 का विकल्प तलाश रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अमेरिका की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति का हिस्सा है, जो चीन और रूस के साथ सौदेबाजी को बढ़ावा देगा।

‘कोर-5’ का मतलब और संभावनाएं

‘कोर-5’ अमेरिका, चीन, रूस, भारत और जापान पर आधारित होगा, जो वैश्विक जीडीपी का बड़ा हिस्सा कवर करता है। ट्रंप के अनुसार, यह समूह व्यापार युद्धों को समाप्त करेगा और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाएगा। भारत के लिए यह एक दुविधा है, क्योंकि एक ओर ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर पीएम नरेंद्र मोदी रूस और चीन के साथ संबंध मजबूत कर रहे हैं। सितंबर 2025 में बीजिंग में हुई भारत-चीन-रूस बैठक ने ट्रंप को चिंतित किया था, जहां मोदी ने पुतिन और शी जिनपिंग के साथ हाथ मिलाया था।

ट्रंप ने ब्रिक्स को ‘गहरे अंधेरे चीन’ का साथी बताया, लेकिन अब वे खुद इस समूह में शामिल होने या इसका विकल्प बनाने की बात कर रहे हैं। चैथम हाउस की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में लैटिन अमेरिका पर फोकस है, लेकिन एशिया में चीन-रूस को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

भारत-रूस-चीन संबंधों पर प्रभाव

भारत के लिए यह प्रस्ताव रणनीतिक महत्व का है। ट्रंप के टैरिफ से भारत रूस से सस्ता तेल आयात बढ़ा रहा है, जो अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद जारी है। दक्षिण चीन सागर और ताइवान जैसे मुद्दों पर चीन के साथ तनाव के बावजूद, मोदी सरकार रूस को रक्षा साझेदार बनाए रख रही है। प्रोजेक्ट सिंडिकेट के विश्लेषक जिम ओ’नील ने कहा, “ट्रंप की नीतियां अनजाने में ब्रिक्स को मजबूत कर रही हैं।” डीडब्ल्यू की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिक्स देश ट्रंप के टैरिफ के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।

ट्रंप का यह कदम अमेरिका की वैश्विक नेतृत्व की छवि को बहाल करने का प्रयास लगता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि चीन और रूस के साथ गठबंधन आसान नहीं होगा। भारत जैसे देशों के लिए यह अवसर और चुनौती दोनों है।

भविष्य की दिशा

अगले कुछ महीनों में ट्रंप प्रशासन ‘कोर-5’ पर औपचारिक चर्चा शुरू कर सकता है। यदि यह साकार हुआ, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था में नया संतुलन बनेगा। ट्रंप ने कहा, “हम सौदे करेंगे, न कि युद्ध।”

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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