नागपुर, 25 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता)
मध्य भारत में वामपंथी उग्रवाद (एलडब्ल्यूई) के खात्मे की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, प्रतिबंधित कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) [सीपीआई (माओवादी)] की महाराष्ट्र-मध्य प्रदेश-छत्तीसगढ़ (एमएमसी) विशेष क्षेत्रीय समिति ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है। पत्र में संगठन के सभी कैडरों का फरवरी 2026 तक सामूहिक समर्पण करने की पेशकश की गई है। यह पत्र 15 फरवरी 2026 तक सशस्त्र संघर्ष को स्थगित करने और सुरक्षा अभियानों को रोकने की मांग के साथ आया है, जो नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति की नई उम्मीद जगाता है।
पत्र में कहा गया है कि संगठन मुख्यधारा में शामिल होने को तैयार है, लेकिन इसके लिए समय और पुनर्वास की व्यवस्था की मांग की गई है। एमएमसी जोन, जो गढ़चिरोली (महाराष्ट्र), बालाघाट (मध्य प्रदेश) और राजनांदगांव-कबीरधाम (छत्तीसगढ़) के घने जंगलों को कवर करता है, में सक्रिय माओवादियों की संख्या में हाल के वर्षों में भारी गिरावट आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह पत्र संगठन की कमजोर होती पकड़ का संकेत है।
पत्र की मुख्य मांगे: समर्पण के लिए 15 फरवरी तक मोहलत
एमएमसी जोन के प्रवक्ता के हवाले से जारी पत्र में तीनों मुख्यमंत्रियों – एकनाथ शिंदे (महाराष्ट्र), मोहन यादव (मध्य प्रदेश) और विष्णु देव साय (छत्तीसगढ़) – को संबोधित किया गया है। इसमें निम्नलिखित प्रमुख बिंदु शामिल हैं:
- सामूहिक समर्पण: सभी कैडर फरवरी 2026 तक हथियार डालने को तैयार, बशर्ते पुनर्वास योजना लागू हो।
- अभियानों पर रोक: समर्पण तक सुरक्षा बलों द्वारा संचालित ऑपरेशनों को तत्काल स्थगित करने की मांग।
- पुनर्वास की गारंटी: समर्पण करने वालों के लिए नौकरी, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था।
- संवाद का प्रस्ताव: राज्य सरकारों से प्रत्यक्ष वार्ता की पेशकश, जिसमें मध्यस्थों की भूमिका हो सकती है।
यह पत्र नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में जारी हिंसा के बीच आया है, जहां हाल ही में कई मुठभेड़ों में माओवादी मारे गए हैं। पत्र की प्रामाणिकता की जांच की जा रही है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गंभीरता से लिया है।
पृष्ठभूमि: नक्सलवाद का पतन और सरेंडर की लहर
मध्य भारत में नक्सलवाद का प्रभाव अब सीमित हो चुका है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रभावित जिले 2014 के 126 से घटकर 2025 में मात्र 38 रह गए हैं। एमएमसी जोन में पिछले दो वर्षों में 200 से अधिक माओवादियों ने समर्पण किया है। यह पत्र उसी निरंतर प्रक्रिया का हिस्सा लगता है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह सरेंडर का प्रस्ताव एलडब्ल्यूई के अंतिम चरण का संकेत है। हम सरकार की पुनर्वास नीतियों को मजबूत करने के लिए तैयार हैं।” हालांकि, कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यह रणनीतिक कदम भी हो सकता है, जिसके लिए सतर्कता बरतनी होगी।
राजनीतिक प्रतिक्रिया: शांति वार्ता पर जोर
तीनों राज्यों की सरकारों ने पत्र का संज्ञान लिया है। महाराष्ट्र के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा, “समर्पण का स्वागत है, लेकिन शर्तें स्वीकार्य नहीं। हम कानूनी प्रक्रिया का पालन करेंगे।” मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के अधिकारियों ने भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से परामर्श की बात कही। विपक्षी दलों ने इसे शांति प्रक्रिया की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
Author: saryusandhyanews
SENIOR JOURNALIST




