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ISRO प्रमुख का महत्वपूर्ण ऐलान: अगले तीन वर्षों में कक्षीय उपग्रहों की संख्या तिगुनी करेंगे, 2040 तक विकसित देशों के बराबर

बेंगलुरु, 25 नवंबर 2025 (विशेष संवाददाता)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष वी. नारायणन ने गुरुवार को घोषणा की कि भारत को अगले तीन वर्षों में कक्षा में मौजूद अपने उपग्रहों की संख्या वर्तमान 55 से तिगुनी करनी होगी, ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। उन्होंने कहा कि 2040 तक भारत को विकसित देशों के स्तर पर पहुंचना होगा, जहां सैकड़ों उपग्रह सक्रिय होंगे। यह बयान ISRO की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, जिसमें 2025 में ही 52 नए उपग्रहों का प्रक्षेपण और 12 लॉन्च शामिल हैं।

नारायणन ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। उन्होंने जोर देकर कहा, “भारत को अपनी उपग्रह क्षमता को तेजी से बढ़ाना होगा। वर्तमान में हमारे पास 55 उपग्रह हैं, लेकिन अगले तीन वर्षों में इसे 150-165 तक पहुंचाना जरूरी है।” यह योजना न केवल संचार, निगरानी और मौसम पूर्वानुमान के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए भी आवश्यक बताई गई।

उपग्रहों की वृद्धि की योजना: 2025 में 52 नए प्रक्षेपण

ISRO प्रमुख ने बताया कि अगले वित्तीय वर्ष में संगठन 52 नए उपग्रह लॉन्च करने की तैयारी में है, जो मौजूदा क्षमता से काफी अधिक है। उन्होंने कहा, “हमारी अंतरिक्ष यान उत्पादन क्षमता को तीन गुना बढ़ाने का लक्ष्य है। यह विस्तार नई तकनीकों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी पर आधारित होगा।” 2025 में 12 प्रमुख लॉन्च अभियान भी निर्धारित हैं, जिसमें PSLV और GSLV रॉकेटों का उपयोग होगा।

इसके अलावा, नारायणन ने भारत के स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन की योजना पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन तैयार होगा, और इसका पहला मॉड्यूल 2028 में कक्षा में स्थापित किया जाएगा।” यह स्टेशन चंद्रयान-3 और गगनयान मिशनों की सफलता पर आधारित होगा, जो भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी बनाएगा।

चुनौतियां और अवसर: निजी क्षेत्र की भूमिका

ISRO के इस विस्तार में निजी कंपनियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया गया है। नारायणन ने कहा, “सरकारी प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करना होगा, ताकि उपग्रह निर्माण और लॉन्च की लागत कम हो।” वर्तमान में भारत के उपग्रह मुख्य रूप से INSAT और IRS श्रृंखला के हैं, जो संचार, पृथ्वी अवलोकन और नेविगेशन के लिए उपयोग होते हैं। लेकिन बढ़ते डिजिटल डिमांड के कारण अधिक उपग्रहों की जरूरत है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह योजना भारत को वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में मजबूत बनाएगी। एक विशेषज्ञ ने कहा, “उपग्रहों की संख्या बढ़ाने से न केवल घरेलू सेवाएं मजबूत होंगी, बल्कि निर्यात के अवसर भी खुलेंगे।” हालांकि, बजट और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।

भविष्य की दृष्टि: 2040 तक विकसित राष्ट्रों के समकक्ष

नारायणन ने 2040 के लक्ष्य को रेखांकित करते हुए कहा, “विकसित देशों में सैकड़ों उपग्रह हैं, जो उनकी अर्थव्यवस्था का आधार हैं। भारत को भी इसी स्तर पर पहुंचना होगा।” यह बयान भारत की ‘अमृत काल’ दृष्टि के अनुरूप है, जिसमें अंतरिक्ष क्षेत्र को 100 अरब डॉलर का बाजार बनाने का लक्ष्य है।

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Author: saryusandhyanews

SENIOR JOURNALIST

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